भारत–अमेरिका टैरिफ़ स्थिति (10 अगस्त 2025)
वर्तमान स्थिति का सारांश
अमेरिका द्वारा 50% टैरिफ़ पर फैसला
6 अगस्त 2025 को, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत से आने वाले आयातों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ़ की घोषणा की, जिससे कुल टैरिफ़ 50% हो गया है। यह कार्रवाई दिल्ली द्वारा रूस से तेल आयात जारी रखने के विरोध में की गई थी।
भारतीय प्रतिक्रिया
भारत ने इस कदम को “अनुचित और गैर-तर्कसंगत” करार दिया, और इस पर दोहरे मानदंडों का आरोप लगाया। प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि वे भारतीय किसानों के हितों की रक्षा के लिए “भारी कीमत चुकाने को तैयार” हैं।

व्यापार वार्ता में ठहराव
ट्रेड वार्ता के दौरान कई दौर की बातचीत के बाद भी समझौते में कोई मुकाम नहीं आया। हाल ही में ट्रम्प प्रशासन ने अचानक 25% टैरिफ के साथ अतिरिक्त दंडात्मक टैरिफ़ का ऐलान कर वार्ता को पटरी से उतार दिया।
उद्योगों पर प्रभाव
जूतों का क्षेत्र: भारत के गैर-लेटदर फुटवियर निर्यातकों को 50% टैरिफ के चलते चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धा और मुनाफाखोरी प्रभावित हो रही है।
गुजरात का गहना उद्योग: गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में उछाल और 50% टैरिफ की वजह से गहना उद्योग को भारी नुकसान हो रहा है—निर्यात में 70% की गिरावट और कामगारों की परेशानी बढ़ रही है।
बैंकिंग क्षेत्र का नजरिया: एसबीआई के चेयरमैन ने बताया कि टैरिफ़ का सीधा प्रभाव सीमित है, लेकिन रसायन, वस्त्र, रत्न और अन्य क्षेत्र असमंजस की स्थिति में हैं। निर्यात विविधता को किसी हद तक राहत देने वाला कारक माना जा रहा है।
वैश्विक और रणनीतिक परिप्रेक्ष्य
BRICS प्रतिक्रिया: ब्रिक्स देशों द्वारा संयुक्त प्रतिक्रिया पर विचार किया जा रहा है, जो अमेरिका के संकुचित व्यापार दबाव का सामना करने में सहयोग कर सकता है।
यूएस रणनीतिक दृष्टिकोण: आंतरिक दस्तावेजों के अनुसार, अमेरिकी टैरिफ़ नीति केवल व्यापार घाटे तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापक रणनीतिक हितों — जैसे कि चीन के प्रभाव को सीमित करना, रक्षा सहयोग और अमेरिकी कंपनियों को लाभ पहुंचाना — से भी जुड़ी है।
शेयर बाज़ार पर प्रभाव: टैरिफ़ वृद्धि का असर भारतीय शेयर बाजार और आर्थिक धारणा पर नकारात्मक पढ़ सकता है, जिससे भारत–चीन स्टॉक वैल्यू गैप गहरा सकता है।
निष्कर्ष
भारत और अमेरिका के बीच वर्तमान टैरिफ़ गतिरोध वैश्विक व्यापार, क्षेत्रीय उद्योगों, और द्विपक्षीय संबंधों पर व्यापक प्रभाव डाल रहा है। भारतीय उद्योग विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जबकि भारत सरकार और निजी क्षेत्र दोनों अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं।
संपादक:- दिनेश बम शैल ग्लोबल टाइम्स रुद्रपुर उत्तराखंड ।

