रुद्रपुर में काशीपुर बाइपास रोड के अतिक्रमण पर सियासी बयानबाजी फिर सूरु ।

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संपादक दिनेश बम शैल ग्लोबल टाइम्स रुद्रपुर।

रुड्रपुर के प्रमुख बाईपास मार्ग काशीपुर बाईपास के चौड़ीकरण व ध्वस्तीकरण को लेकर शहर में एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इसको लेकर प्रज्ञा द ओथ फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं याचिकाकर्ता भूपेंद्र चौधरी ने मंगलवार और बुधवार को दो­दफा प्रेसवार्ता कर कहा कि सत्ताधारी जनप्रतिनिधि सिर्फ दुकानदारों को झूठा दिलासा दे रहे हैं, जबकि अदालत के आदेश का सही पालन नहीं हो रहा है।
बयानबाजी का क्रम
विकास शर्मा (मेयर) ने पहले कहा था कि बाईपास मार्ग पर 10–12 अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

इसके बाद शिव अरोरा (विधायक) ने इंटरनेट मीडिया पर एक बयान जारी किया जिसमें कहा गया कि शासन-प्रशासन के साथ बैठक के बाद बाईपास मार्ग का ध्वस्तीकरण एवं चौड़ीकरण 60 फीट के दायरे में होगा।

इसके बाद भूपेंद्र चौधरी ने बुधवार को सिटी क्लब में पत्रकारों से कहा कि यह बयानबाजी “अवैध कब्जेदारों की हितैषी बनने का नाटक” है। वे चाहते हैं कि हाईकोर्ट के आदेशानुसार दोनों ओर 75-75 फीट के दायरे में अतिक्रमण हटाया जाए।
फाउंडेशन की धमकी
चौधरी ने स्पष्ट कहा कि यदि अदालत के आदेशों का पालन नहीं हुआ तो फाउंडेशन सुप्रीम कोर्ट का सहारा लेगी। साथ ही कहा गया कि शहर के आठ ऐसे स्थान चिन्हित किए गए हैं जहाँ लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है—इन क्षेत्रों में अवैध कब्जे चल रहे हैं और नेताओं द्वारा उनकी मिलीभगत हो रही है।
मेयर एवं विधायक की स्थिति
मेयर विकास शर्मा ने कहा कि वर्तमान में रिंग रोड का निर्माण हो रहा है, इसलिए चौड़ीकरण में 60 फीट का दायरा प्राथमिकता से प्रस्तावित किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन के माध्यम से न्यायालय से आग्रह किया जाएगा ताकि “कम से कम नुकसान के साथ” कार्य हो सके।

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विधायक शिव अरोरा ने बताया कि पूर्व में जिला प्रशासन, मेयर और अन्य जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में बैठक हुई थी जिसमें सहमति बनी थी कि 60 फीट तक चौड़ीकरण किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि बयान में कहीं भी न्यायालय के आदेश की अवहेलना नहीं कही गई है।
अदालत में क्या है मामला
पहले प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, हाईकोर्ट ने इस बाईपास मार्ग के दोनों ओर करीब 22.5 मीटर (लगभग 75 फीट) तक के अतिक्रमण को हटाने का निर्देश दिया था।  

1.28 किमी लंबे उक्त मार्ग का प्रस्तावित चौड़ीकरण “दोनों ओर 60 से 75 फीट” की सीमा में हो सकता है।  

अतिक्रमण के चलते कार्य पूर्व में बाधित था; नगर निगम-प्रशासन ने अतिक्रमण चिह्नित कर नोटिस जारी किए थे।  

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प्रमुख बिंदु
दुकानदारों एवं कब्जाधारकों में चिंता है कि 75 फीट की बजाय 60 फीट का दायरा अपनाने में उनकी दुकान-व्यवसाय प्रभावित होगा।

फाउंडेशन तथा याचिकाकर्ता का आरोप है कि 60 फीट की बात कर के नेताओं द्वारा अवैध कब्जेदारों को राहत देने की कोशिश की जा रही है।

मेयर और विधायक का मानना है कि व्यावहारिकता, निर्माणाधीन रिंग रोड तथा “कम नुकसान” की दृष्टि से 60 फीट सीमा उपयुक्त है।

हाईकोर्ट आदेश का पालन और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया अभी भी विवादित है।

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आगे क्या संभव है
यदि 60 फीट के दायरे में कार्य किया जाता है, तो फाउंडेशन द्वारा सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना जताई गई है। वहीं, प्रशासन को न्यायालय के आदेश के अनुरूप विस्तारपूर्वक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। कार्यवाही की गति, किराएदारों-दुकानदारों को दी जाने वाली राहत एवं पुनर्व्यवस्था की नीति भी ध्यान का विषय होगी।

इस विवाद से यह स्पष्ट हो गया है कि पूरी प्रक्रिया सिर्फ रोड चौड़ीकरण की नहीं बल्कि राजनीति-प्रशासन-वित्तीय हितों के बीच संतुलन की भी है। अब देखने वाली बात यह है कि क्या कार्य संविधान, न्यायालय एवं लोकहित की दिशा में निष्पक्ष रूप से निष्पादित होगा।

इस मुद्दे की पृष्ठभूमि क्या है ।

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  • काशीपुर बाईपास का उद्देश्य है रुड़्रपुर-उधम सिंह नगर जिले में वाहनों के बेहतर प्रवाह को सुनिश्चित करना, यातायात जाम कम करना एवं विकास-क्षेत्र को सुदृढ़ करना।
  • जनवरी 2025 में रिपोर्ट में कहा गया कि 1.28 किमी लंबी इस बाईपास के डीडी चौक से गाबा चौक तक दोनों ओर चौड़ीकरण प्रस्तावित है, जहाँ “सड़क के मध्य से दोनों तरफ़ 60-75 फीट” तक अतिक्रमण हटाने की तैयारी है।  
  • कहा गया है कि नजूल भूमि (municipal/nazul land) बनी हुई है तथा दोनों ओर आवासीय-व्यवसायिक भवन एवं अवैध अतिक्रमण मौजूद हैं।  
  • इसके चलते प्रशासन को पानी/बिजली लाइनों के स्थानांतरण, अतिक्रमण राउंड-अप, सर्वे-शिमांकन इत्यादि कई बुनियादी बाधाओं का सामना करना पड़ा है।  



पूर्व याचिकाएँ एवं न्यायालयी आदेश

जुलाई 2023 में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य में राष्ट्रीय एवं राजकीय राजमार्गों तथा नदी किनारों पर अवैध अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था।  

जनवरी 2025 की रिपोर्ट में यह बताया गया कि बाईपास के चौड़ीकरण के लिए बुनियादी शर्त यह है कि हाई-कोर्ट में याचिका का निस्तारण हो और अतिक्रमण हटाए जाएँ।  

अगस्त 2025 में एक रिपोर्ट में कहा गया कि चिह्नांकन कार्य शुरू हुआ है — लाल निशान लगाए गए, दोनों ओर 22.5 मीटर (≈75 फीट) तक के दायरे में अतिक्रमण हटाये जाने की प्रक्रिया में हैं।  

इस तरह कहा जा सकता है कि न्यायालय ने स्पष्ट रूप से अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है और सड़क के दोनों ओर आवश्यकता अनुसार भूमि खाली करने का हुक्म है।



प्रभावित दुकानदार-व्यवसायियों की आवाज़

2017 में एक रिपोर्ट थी जिसमें बाईपास क्षेत्र के लगभग 200 दुकानदारों ने एडीएम से मिलकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी, क्योंकि उन्होने दावा किया था कि वे 30 साल से अपने व्यवसाय कर रहे हैं और करोड़ों रूपए का निवेश किया है।  

वहाँ यह चिंता जताई गई थी कि यदि 75 फीट तक कब्जा हटाना हुआ, तो “बाईपास पर एक भी दुकान न बचेगी” जैसी स्थिति बन सकती है।  

इस तरह यह स्पष्ट है कि दुकानदारों-व्यवसायियों को व्यवसाय-स्थल, निवेश और पुनर्स्थापना के दृष्टिकोण से गंभीर चिंताएं हैं।



प्रशासन- कार्रवाई की चुनौतियाँ एवं वर्तमान स्थिति
मई 2023 की रिपोर्ट में कहा गया कि इस बाईपास चौड़ीकरण परियोजना में 198 पहچाने गए अतिक्रमण हैं — जिनमें 74 पक्के व 124 टिन-शेड शामिल हैं।  

मार्च 2025 में जिला मजिस्ट्रेट द्वारा निर्देश दिया गया कि प्रमुख सड़क-विस्तार परियोजनाओं में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई 2 सप्ताह में पूरी की जाए।  

जनवरी 2025 की रिपोर्ट में पुनः कहा गया कि चौड़ीकरण मार्ग बाधित हो रहा है क्योंकि वर्तमान सड़क नजूल भूमि व अतिक्रमण में है; शिफ्टिंग एवं शिमांकन प्रक्रिया लंबी चल रही है।  

अगस्त 2025 में चिह्नांकन हेतु टीम लगी — दोनों ओर 22.5 मीटर तक कब्जा हटाने की नोटिस प्रक्रिया शुरू।
विश्लेषण एवं भविष्य की चुनौतियाँ
न्यायालय का आदेश स्पष्ट है: अतिक्रमण हटाएँ, शिमांकन करें, और सड़क-विस्तार हेतु आवश्यक भूमि 확보 करें। इस क्रम में प्रशासन ने कदम उठाये हैं, लेकिन दुकानदार-व्यवसायियों की चिंताएँ अभी शांत नहीं हुई हैं।

प्रमुख चुनौती है “नजूल भूमि + पुराने व्यवसायों + पुनर्स्थापना नीति” — जहाँ व्यवसायियों का निवेश, दुकान-स्थिति, पुनर्स्थापन विकल्प विवादित बने हुए हैं।

यदि चौड़ीकरण दायरा घटकर 60 फीट रह जाता है, तो न्यायालय के आदेश-दायरे से विरोध पैदा हो सकता है।

संचालन-प्रभाव (व्यापार प्रभाव, दुकानें हटने की संभावना), राजनीतिक बयानबाजी (आपका ऊपर उद्धृत मामला) और प्रशासन-रणनीति (न्यायालय-अनुरूप बनावट) तीनों एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।

आगे क्या होना चाहिए: प्रशासन को निवेश प्रभावितों के लिए स्पष्ट पुनर्स्थापना नीति देना चाहिए। व्यवसायियों-दुकानदारों को समय-सीमा, विकल्प, मुआवजा आदि की जानकारी होनी चाहिए। न्यायालय को भी अनुपालन रिपोर्ट-मॉनिटरिंग करनी होगी।

संपादक दिनेश बम शैल ग्लोबल टाइम्स रुद्रपुर उत्तराखंड ।