ऊर्जा प्रदेश उत्तराखंड: टिहरी से देश को रोशनी, अपने घरों में किल्लत क्यों?

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संपादक दिनेश बम रुद्रपुर उत्तराखंड ।

देहरादून, 4 सितंबर 2025।

गंगा की सहायक नदी भागीरथी पर बना टिहरी हाइड्रो पावर कॉम्प्लेक्स उत्तर भारत की बिजली रीढ़ है—टिहरी HPP (1000 MW) + कोटेश्वर HEP (400 MW) + टिहरी पम्प्ड स्टोरेज प्लांट (PSP, 1000 MW) मिलाकर कुल 2,400 MW की क्षमता। टिहरी–कोटेश्वर से बनने वाली बिजली का बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय ग्रिड के माध्यम से उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, जम्मू–कश्मीर, हिमाचल और चंडीगढ़ तक जाता है; वहीं उत्तराखंड को तय हिस्सेदारी व ‘फ्री पावर’ के रूप में हिस्सा मिलता है।  



फिर भी किल्लत क्यों?


मांग तेज़ी से बढ़ी: 2025 की गर्मियों में उत्तराखंड की पीक डिमांड उछली और UPCL ने ~500 MW की कमी का अनुमान जताया। गर्म हवाओं/हीटवेव से खपत बढ़ी।  




वितरण व खरीद पर निर्भरता: राज्य वितरण कंपनी (UPCL) मांग के अनुसार शॉर्ट-टर्म PPAs और ओपन मार्केट से खरीद करती है; आयोग ने 2025 में ओपन-ऐक्सेस उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त सरचार्ज भी स्वीकृत किया। जरूरत पड़ने पर लोड शेडिंग का अनुमोदित प्रोग्राम लागू होता है।  



टिहरी की बिजली कई राज्यों में बँटी: Tehri HPP से उत्‍तराखंड को ~12–13% ‘फ्री पावर’ ऐतिहासिक रूप से मिलता है, बाकी आवंटन दीर्घकालीन समझौतों/राष्ट्रीय ग्रिड के हिसाब से अन्य राज्यों में जाता है। (नोट: प्रतिशत समय-समय पर MoP/NRPC आदेशों से अद्यतन होते हैं।)  



नया समीकरण—PSP के अनुबंध: टिहरी PSP से पीक-आवर आपूर्ति/स्टोरेज के लिए राज्यों के साथ अलग-अलग अनुबंध हो रहे हैं; हाल में गुजरात ने 1000 MW PSP में से ~184 MW का समझौता किया।  



परियोजना क्षमता व हिस्सेदारी के दृश्य आँकड़े

1) टिहरी हाइड्रो पावर कॉम्प्लेक्स: स्थापित क्षमता (MW)

डाउनलोड चार्ट (PNG)

2) टिहरी HPP की ‘फ्री पावर’ शेयर का चित्रण (सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुरूप ~12% उत्तराखंड; शेष अन्य लाभार्थी)

डाउनलोड चार्ट (PNG)

नोट: राज्य-वार MW आवंटन (Tehri HPP/Kotesh्वर/PSP) समय-समय पर बदलते हैं और MoP/NRPC/THDC के आदेश/PPAs पर निर्भर रहते हैं; एकीकृत नवीनतम MW ब्रेकअप सार्वजनिक डोमेन में विखंडित रूप में उपलब्ध है। ऊपर दिया पाई-चार्ट ‘फ्री पावर’ हिस्से का पुष्ट, प्रतिनिधि दृश्य है; PSP की सप्लाई अलग PPAs/MoUs (जैसे गुजरात) से तय होती है।  



ज़मीनी असर
गर्मी के महीनों में मांग का चरम, नदी प्रवाह में मौसमी उतार-चढ़ाव और ट्रांसमिशन सीमाएँ मिलकर प्रदेश में रोटेशनल कटौतियों की नौबत ला देती हैं—खासतौर पर ग्रामीण/औद्योगिक फ़ीडरों पर। न्यायालय व नियामक के हालिया आदेश भी इस पर निगाह बनाए हुए हैं।  



आगे की राह 


पीक-मैनेजमेंट: टिहरी PSP का पूरा वाणिज्यिक उपयोग और समयबद्ध पीक-आवर अनुबंध।

ट्रांसमिशन मज़बूती: ADB-समर्थित परियोजनाओं से 220/400 kV नेटवर्क उन्नयन व वितरण सुधार।  

डेटा-पारदर्शिता: MoP/NRPC आवंटन आदेशों का राज्य-स्तर पर संक्षिप्त, नियमित प्रकाशन ताकि उपभोक्ता को स्पष्टता मिले। 


राज्य-वार बिजली वितरण व ‘फ्री पावर’ हिस्सेदारी

उत्तराखंड को ‘फ्री पावर’ के रूप में 12–13% हिस्सा मिलता है, जैसा कि केंद्रीय और THDC द्वारा घोषित किया गया था।  

इसमें बताया गया कि उत्तर प्रदेश इस परियोजना का 25% इक्विटी भागीदार है; केंद्र का हिस्सा लगभग 75% है।  

PSP (Pumped Storage Plant) से हाल ही में गुजरात ने 184 MW की ऊर्जा खरीदने का MoU किया है।  



चार्ट व दृश्य प्रस्तुति की जानकारी 

1. 

राज्य-वार बिजली वितरण (%)

(विस्‍तृत अखबार रिपोर्ट के लिए सुझाव)

  • उत्तराखंड: ~12–13% (फ्री पावर)
  • उत्तर प्रदेश: ~25% (इक्विटी आधार पर)
  • दिल्ली: ~11.2%
  • राजस्थान: ~10%
  • हरियाणा: ~8.5%
  • पंजाब: ~8%
  • हिमाचल प्रदेश + जम्मू–कश्मीर: ~1.6% + ~1.2%
  • चंडीगढ़: ~0.6%

2. 

PSP (1,000 MW क्षमता) में से गुजरात की हिस्सेदारी

अवशिष्ट अन्य राज्य/ग्रिड: शेष 815.92 MW (81.6%)

गुजरात: 184 MW (18.4%) — हालिया समझौता