रुद्रपुर, 5 सितंबर 2025।
डाले गए तस्वीर में साफ़ दिख रहा है कि 2018 में ₹80 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से शुरू की गई इस इंटर-स्टेट बस टर्मिनल (ISBT) परियोजना का परिणाम क्या रहा—विडंबना है कि यह अब जर्जर और अधूरा बना पड़ गया है।
अब तक की कहानी:

- स्थापित ढांचा तो खड़ा हो गया, लेकिन वर्कशॉप के टाइल्स गिरना, सीवर लाइन का भीतर निर्माण आदि जैसी तकनीकी खामियाँ बरकरार हैं।
- पुराना बस अड्डा भी बेमायने जर्जर हो चुका है—दीवारों में दरारें, छतों से सीमेंट का गिरना आम दृश्य है।
- बावजूद इसके, कितनी राशि खर्च हुई, इसका कोई पारदर्शी आकलन उपलब्ध नहीं है—लेकिन निश्चित रूप से जनता की सोची-समझी कमाई का भावी नुकसान बन चुका है।
जनता की नाराज़गी:
स्थानीय लोगों का कहना है, “इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी सुविधा नहीं मिली—बस एक अधूरा और जर्जर ढांचा ही मिला है।” जरूरत है कि प्रशासन तत्काल परियोजना को पूरा करे और जनता की उम्मीदों पर खरी उतरे।
नेताओं की उदासीनता:
एक ओर जनता इंतजार कर रही है कि यह परियोजना कब पूरी होगी, वहीं दूसरी ओर यहाँ के नेता मात्र एक-दूसरे की टांग खींचने में व्यस्त नजर आते हैं—इसका प्रभाव आज जनता और क्षेत्र पर साफ़ झलकता है।
संपादक दिनेश बम शैल ग्लोबल टाइम्स रुद्रपुर उत्तराखंड ।

