शैल ग्लोबल टाइम्स | विशेष रिपोर्ट
वाशिंगटन/तेहरान: वैश्विक राजनीति में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बहुप्रतीक्षित वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “ईरान ने हमारी प्रमुख शर्तों को मानने से इनकार कर दिया है, ऐसे में हमारे पास वार्ता से वापस लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।”
यह वार्ता मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर हो रही थी। अमेरिका की ओर से मांग की गई थी कि ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को सीमित करे और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण एजेंसियों को पूर्ण सहयोग दे। वहीं, ईरान ने इन शर्तों को अपनी संप्रभुता में हस्तक्षेप बताते हुए अस्वीकार कर दिया।

सूत्रों के अनुसार, वार्ता के अंतिम दौर में दोनों देशों के बीच मतभेद और अधिक गहरे हो गए थे। अमेरिका चाहता था कि ईरान तत्काल प्रभाव से अपने संवर्धन स्तर को कम करे, जबकि ईरान पहले आर्थिक प्रतिबंधों में राहत की मांग पर अड़ा रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वार्ता के विफल होने से मध्य-पूर्व में अस्थिरता और बढ़ सकती है। तेल बाजार पर इसका सीधा असर पड़ सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। पहले से ही कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है और निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ गई है।
अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि वह अब ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए कड़े आर्थिक और कूटनीतिक कदम उठा सकता है। वहीं, ईरान ने भी चेतावनी दी है कि यदि उस पर दबाव बनाया गया तो वह अपने परमाणु कार्यक्रम को और तेज कर सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर यूरोपीय देशों ने दोनों पक्ष

