शैल ग्लोबल टाइम्स | विशेष संपादकीय रिपोर्ट)
उत्तराखंड का अंकिता हत्याकांड अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं रहा, बल्कि यह उस VIP संस्कृति का भयावह प्रतीक बन चुका है, जहाँ सत्ता, पैसे और प्रभाव के आगे एक आम लड़की की ज़िंदगी की कोई कीमत नहीं रह जाती।
जांच रिपोर्ट, चार्जशीट और अब तक की अदालती कार्यवाहियों में यह बात बार-बार सामने आई है कि अंकिता पर किसी “खास मेहमान / VIP” के लिए विशेष सेवा देने का दबाव बनाया गया था। जब अंकिता ने साफ इनकार किया, तो उसकी आवाज़ को हमेशा के लिए खामोश कर दिया गया।

सबसे बड़ा और सबसे अहम सवाल — वह VIP आखिर है कौन?
जांच एजेंसियाँ यह तो मानती हैं कि दबाव किसी प्रभावशाली व्यक्ति को खुश करने के लिए बनाया गया था, लेकिन आज तक—
- उस VIP की पहचान सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
- क्या वह राजनीतिक रसूख वाला व्यक्ति है?
- क्या उसके तार प्रशासन, सत्ता या आर्थिक ताकत से जुड़े हैं?
अगर वह VIP कोई “साधारण व्यक्ति” होता, तो क्या उसका नाम अब तक छिपा रह पाता?
क्या VIP होना कानून से ऊपर होने की छूट है?
अंकिता की हत्या के बाद जिस तरह—
- सबूतों को मिटाने की कोशिश हुई,
- मोबाइल डेटा से छेड़छाड़ के आरोप लगे,
- और शव को नहर में फेंक दिया गया,
इन सबने यह संदेह और गहरा कर दिया है कि कहीं न कहीं किसी ताकतवर को बचाने की कोशिश की गई।
समाज के सामने खड़ा सवाल
यह मामला सिर्फ अंकिता का नहीं है।
यह सवाल हर उस बेटी का है, जो सिस्टम के भरोसे जीती है।
अगर आज भी उस VIP का नाम सामने नहीं आता,
तो यह मानना पड़ेगा कि हमारे समाज में—
कानून सबके लिए बराबर नहीं है।
शैल ग्लोबल टाइम्स यह सवाल लगातार उठाता रहेगा—
क्या एक आम लड़की की जान, किसी VIP की “सुविधा” से कम है?
और क्या सच कभी पूरी तरह सामने आएगा?
एक बेटी मारी गई…
क्योंकि उसने “VIP” की सेवा से इनकार किया।
VIP का ज़िक्र है,
दबाव की बात है,
हत्या की सच्चाई है—
पर VIP का नाम नहीं।
क्या यही है न्याय?
क्या VIP होना कानून से ऊपर होने की पहचान है?
शैल ग्लोबल टाइम्स पूछता है—
VIP का नाम कब सामने आएगा?
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